International Journal of Advanced Education and Research

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International Journal of Advanced Education and Research
Vol. 3, Issue 3 (2018)

उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर योग शिक्षा के प्रभाव का अध्ययन (झारखण्ड के पूर्वी सिंहभूम जिले के संदर्भ में )


ओम प्रकाश, डाॅ0 पी0 के0 नायक

योग एक मानस शास्त्र है जिसमें मन को संयत करना और पाशविक वृत्तियों से खींचना सिखाया जाता है। जीवन की सफलता, किसी भी क्षेत्र में संयत मन पर भी निर्भर करती है। मनःसंयम का अभिप्राय है किसी एक समय में किसी एक ही वस्तु पर चित्त का एकाग्र होना। दीर्घकाल तक अभ्यास करने से मन का ऐसा स्वभाव बन जाता है। किसी विषय को सोचते या किसी काम को करते हुए मन उस पर एकाग्र रहे, ऐसा अभ्यास करना आरंभ में तो बड़ा कठिन होता है, पर जब अभ्यास करते-करते वैसा स्वभाव बन जाता है, तब उससे बड़ा सुख होता है। पढ़ाई के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए हो, उन विद्यार्थियों के लिए योग प्रक्रिया चमत्कार जैसा काम करती हैं। सुबह के वक्त योग करने से विद्यार्थियों में एकाग्रता और स्मरण शक्ति बेहतर होती है। योग का अभ्यास नियमित तौर पर करने से आपका मस्तिष्क शक्तिशाली एवं संतुलन बनता है। इससे बच्चों में बचपन से ही अच्छी सोच का विकास होता है और वे सदा सकारात्मक बनते है। झारखण्ड के पूर्वी सिंहभूम जिले के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालय के विद्यार्थियों में योगशिक्षा के प्रति जागरूकता की जानकारी प्राप्त किया है।
Pages : 55-58