International Journal of Advanced Education and Research

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International Journal of Advanced Education and Research
Vol. 4, Issue 2 (2019)

ब्रिटिश कालीन : नारी जागरण के समर्थन में महिलाओं की भूमिका का अध्ययन


डाॅ0 संजय कुमार मिश्रा

नारी जागरण के समर्थन में महिलाओं की भूमिका के संबंध में उनकी ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक भूमिका सम्यक विश्लेषण किया गया है। नारी जागरण के समर्थन में महिलाओं की भूमिका से संबंधित है। कोई भी आंदोलन या कोई भी सुधार तब तक सफल नहीं होता या लोगों की नजर में नहीं आता जब तक उसमें जिनके लिये सुधार के लिये मांग की गई उनकी एक बडे़ पैमाने पर सशक्त भूमिका न हो। इस शोध अध्ययन में मैने इस अध्याय के दौरान पाया कि सामान्य नारियों का एक बहुत बड़ा वर्ग इस जागरण के लिये आवाज उठा रहा था। मैंने इस अध्याय को महत्वपूर्ण और विशिष्ट महिलाओं के 17वीं शताब्दी से ही योगदान को समर्पित किया है और कोशिश की है कि ईमानदारी के साथ सभी उन महिलाओं को जिक्र कर सकू जिनके कारण नारी की स्थिति में सुधार हुआ और नारी होने के नाते नारियों ने जिनके कारण गर्व का अनुभव किया इसमें कित्तुर रानी चिन्नमा, जो कर्नाटक मेें पैदा हुई और कित्तुर की रानी बनी और उन्होनें ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया के खिलाफ 1824 में एक सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था। मैंने अपने इस अध्ययन में रानी अब्बका चैटा जो उलाल की रानी थी। 1525 से लेकर 1570 तक उनका काल निर्धारण किया जाता है और उन्होंने 16वीं शताब्दी के उत्तर्राद्ध में उपनिवेशवादि शक्तियों के खिलाफ उन्होनें संघर्ष का विगुल फूंकते हुए पुर्तगालियों के साथ संघर्ष किया उनका भी उल्लेख किया है।
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