International Journal of Advanced Education and Research

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ISSN: 2455-5746

Vol. 4, Issue 5 (2019)

बौद्धकालीन शिक्षा के प्रमुख तत्व

Author(s): डाॅ0 जय प्रकाश पटेल, अंजू सिंह पटेल
Abstract: भारतीय शिक्षा के विकास क्रम में बौद्धकालीन शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण स्थान है। इस समय की शिक्षा संस्थाओं में लोकतांत्रिक व्यवस्था होना साधारण बात नहीं थी, क्योंकि तत्कालीन समाज में सामन्तवाद का बोलबाला था। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में भी जनतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता है। इससे जाति, लिंग एवं क्षेत्र के आधार पर विभेदीकरण समाप्त हो जाएगा। सभी नागरिकों को शिक्षा का समान अवसर प्राप्त होगा। इसी प्रकार बौद्धकालीन छात्रों एवं अध्यापकों का सरल जीवन को अपनाने की जरूरत है। इससे हमारे देश में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव कम होगा और भारतीयता का भशव परिपक्व होगा। बौद्धकालीन शान्ति एवं अहिंसा आज भी भारतीय समाज में अनुकरणीय है। इसे प्रत्येक शिक्षा संस्थाओं में प्रमुखता से क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। इसी प्रकार छात्रों एवं शिक्षकों में अनुशासन को सरलता से बनाए रखने में आत्मनिरीक्षण सर्वोत्तम विधि मानी जाती है। इसे भी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में स्वीकार किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त अन्य कई बौद्धकालीन शिक्षा व्यवस्था की विशेषताएं वर्तमान शिक्षा प्रणाली के लिए ग्रहणीय है, जिसका वर्णन शोध पत्र में है।
Pages: 30-32  |  633 Views  552 Downloads
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