International Journal of Advanced Education and Research

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ISSN: 2455-5746

Vol. 4, Issue 5 (2019)

साहित्यकार की प्रतिबद्धता और साहित्य में प्रति-सौंदर्यका अध्ययन

Author(s): डॉ. अमिय कुमार साहु
Abstract: हर साहित्यकार को किसी ना किसी के प्रति प्रतिबद्ध होना पड़ता है और साथ-साथ साहित्य को भी। प्रतिबद्ध होना साहित्य के लिए पहली और अनिवार्य शर्त है। सही तरह से देखा जाए तो प्रतिबद्धता मार्क्सवादी समीक्षा का एक पारिभाषिक शब्द है जो पूंजीपति वर्ग के खिलाफ सामान्य वर्ग के साथ जुड़ाव का परिचायक है। प्रतिबद्धता का अभिप्राय हुआ श्रमिक वर्ग का साथ देकर क्रांतिकारी परिवर्तन में अपनी भूमिका अदा करना अर्थात मार्क्सवादी विचारधारा में प्रतिबद्धता क्रांति शब्द के साथ घुलमिल गया है। अगर हम इस परिभाषा से हटकर इसका सामान्य अर्थ लगाएं तो इसका अर्थ यही होगा कि यह किसी के लिए, किसी के प्रति, किसी विषय के लिए, किसी समूह के लिए या किसी वर्ग के लिए बद्ध होना। अब सवाल यह उठता है कि हम किसके प्रति प्रतिबद्ध हैं और अगर हम साहित्य की बात करें तो यह किस का पक्षधर हो? साहित्य की इस प्रतिबद्धता का विश्लेषण करना और इस प्रतिबद्धता में प्रति-सौन्दर्य को तलाशना इस शोध-लेख का उद्देश्य है।
Pages: 48-49  |  101 Views  29 Downloads
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