International Journal of Advanced Education and Research

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Vol. 5, Issue 5 (2020)

चैलुक्य वंश का राजनीतिक इतिहास एवं साम्राज्य विस्तार हेतु संघर्ष


रेनू सिंह

अन्हिलवाड़ की चैलुक्य साम्राज्य के उदय से पूर्व गुजरात का इतिहास समान्यतः कन्नौज के गुर्जर प्रतिहार वंश से संबंधित रहा है। प्रतिहार वंश के शासक महेन्द्रपाल का साम्राज्य गुजरात तक विस्तृत था तथा उसके उत्तराधिकारी महीपाल ने भी कम से कम 914 ई0 तक यहां अपना अधिकार बनाए रखा। महीपाल की राष्ट्रकूट शासक इंद्र तृतीय (915 ई0 से 917 ई0) द्वारा पराजय के पश्चात प्रतिहारों की स्थिति निर्बल पड़ गई। राष्ट्रकूटों के साथ अनवरत संघर्ष के परिणाम स्वरूप गुजरात क्षेत्र अराजकता एवं अव्यवस्था का शिकार हो गया। प्रतिहारों तथा राष्ट्रकूटों के पतन के उपरांत चैलुक्यों को गुजरात में अपनी सत्ता स्थापित करने का सुअवसर प्राप्त हो गया। चैलुक्य शासक धार्मिक रूप से सहिष्णु थे। इस काल में जैन एवं शैव धर्म का समन्वय मिलता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि चैलुक्य राजवंश ने सांस्कृतिक, कला एवं साहित्य के क्षेत्र में विशेष उन्नति की।
Pages : 58-61