ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 5 (2018)
छायावादी काव्य परम्परा का उद्भव एवं विकास
Authors
डाॅ0 कंचनलता सिंह
Abstract
छायावाद कव्य ने ही नहीं, समूचे छायावादी काव्य के मूल में अवश्य ही नैतिक विवेक करता दिखाई देता है किन्तु उसकी जड़े बड़ी बारीक और गहरी है। वास्तव में काव्य की सृजन प्रक्रिया में कवि का कृतित्व, काव्य का कार्य विषय और काव्य का प्रभाव-परिणाम नामक तीन तत्व काम करते दिखाई पड़ते है।
Download
Pages:67-69
How to cite this article:
डाॅ0 कंचनलता सिंह "छायावादी काव्य परम्परा का उद्भव एवं विकास". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 3, Issue 5, 2018, Pages 67-69
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
