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VOL. 6, ISSUE 4 (2021)
माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता एवं समायोजन के प्रभाव का अध्ययन
Authors
डाॅ. पूनम मदान, रवि कान्त
Abstract
शिक्षा मानव विकास का मूल साधन है। इसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान एवं कला कौशल में वृद्धि तथा व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है और उसे सभ्य, सुसंस्कृत एवं योग्य नागरिक बनाया जाता है और यह कार्य मनुष्य के जन्म से प्रारम्भ हो जाता है। बच्चे के जन्म के कुछ दिन बाद ही उसके माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य उसे सुनना और बोलना सिखाने लगते हैं। जब बच्चा कुछ बड़ा होता है तो उसे उठने-बैठने, चलने-फिरने, खाने-पीने तथा सामाजिक आचरण की विधियाँ सिखाई जाने लगती हैं। जब वह तीन-चार वर्ष का होता है तो उसे पढ़ना-लिखना सिखाने लगते हैं। इसी आयु पर उसे विद्यालय भेजना प्रारम्भ किया जाता है। विद्यालय में इसकी शिक्षा बडे़ सुनियोजित ढंग से चलती है। विद्यालय के साथ-साथ उसे परिवार एवं समुदाय में भी कुछ न कुछ सिखाया जाता रहता है और सीखने-सिखाने का यह काम विद्यालय छोड़ने के बाद भी चलता रहता है और जीवन भर चलता है और विस्तृत रूप से यह प्रक्रिया सदैव चलती रहती है। अपने वास्तविक अर्थ में किसी समाज में सदैव चलने वाली सीखने-सिखाने की यह सप्रयोजन प्रक्रिया ही शिक्षा है।
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Pages:18-19
How to cite this article:
डाॅ. पूनम मदान, रवि कान्त "माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता एवं समायोजन के प्रभाव का अध्ययन ". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 6, Issue 4, 2021, Pages 18-19
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