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VOL. 8, ISSUE 1 (2023)
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता
Authors
डॉ. ज्योति गोयल
Abstract
पंडित दीनदयाल उपाध्याय विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे मानवीय संवेदनाओं और राष्ट्रीय एकता की भावनाओं से ओत-प्रोत थे। उनका व्यक्तित्व एक अद्वितीय राष्ट्रभक्त, समाजसेवी, लेखक, पत्रकार, राजनेता जैसे न जाने कितने आयामों को समेटे हुए था। वे गूढ़ से गूढ़ दार्शनिक बातों को भी आसानी से समझ लिया करते थे। पंडित जी के विचारों की प्रासंगिकता इसी बात से झलकती है कि उन्होंने मानव जीवन के हर पहलू को छुआ, चाहे वो पत्रकारिता हो या राजनीति अथवा समाजसेवा व विकास, हर क्षेत्र में व्यापक जनहित और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर चिंतन किया। वे भारतीय चिंतन परंपराओं के पोषक तो थे ही, आधुनिक व पश्चिमी चिंतन को भी युगानुकूल व देशानुकूल रूप में उपयोग करने के पक्षधर थे। दीनदयालजी को जनसंघ के आर्थिक नीति के रचनाकार के रूप में देखा जाता है। आर्थिक विकास का मुख्य उद्देश्य सामान्य मानव को प्राप्त होने वाला सुख हो, यही पंडित जी का विचार था।1 विचार - स्वातंत्रय के इस युग में मानव कल्याण के लिए अनेक विचारधाराओं को पनपने का अवसर मिला। इनमें विशेष रूप से साम्यवाद. समाजवाद, पूंजीवाद, अन्त्योदय और सर्वाेदय आदि है। लेकिन चराचर जगत् में संतुलन सुन्दरता और मानव समाज को पूर्णता की ओर ले जाने वाला एकमात्र विचार एकात्म मानव दर्शन ही है।2
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Pages:57-58
How to cite this article:
डॉ. ज्योति गोयल "पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 8, Issue 1, 2023, Pages 57-58
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