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VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
शिक्षा और समानताः भारत में आदिवासी बच्चों के अधिकार ‘‘आदिवासी बच्चों के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा का अधिकारः मुद्दे और चुनौतियां‘‘
Authors
डॉ. श्यामलाल1, लकी कुमार श्रीवास्तव2
Abstract
भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आदिवासी आबादी है। हालांकि, स्वतंत्रता के सात दशकों के बाद आदिवासी समूह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण आदि जैसे कई क्षेत्रों में विकास के चक्र से वंचित और सामाजिक रूप से पिछड़े हुए हैं। इनमें आदिवासी समाज के लिए शिक्षा एक अनिवार्य आवश्यकता है। राज्य और केंद्र सरकारों ने आदिवासी समूहों को शिक्षित करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें से कई कार्यक्रमों ने लक्ष्य का केवल 10 प्रतिशत ही हासिल किया है। बड़ी संख्या में आदिवासी लोग विभिन्न स्तरों पर अपनी शिक्षा से वंचित हैं। अनुसूचित जाति की तुलना में आदिवासी आबादी में उच्च निरक्षरता दर के कारण वे शिक्षा में पिछड़ जाते हैं। इसलिए आदिवासी शिक्षा और समावेशी विकास पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है। आदिवासी क्षेत्रों में, हजारों आदिवासी बच्चों ने स्कूल परिसर में प्रवेश भी नहीं किया है, जो अपने आप में शिक्षा के अधिकार अधिनियम का एक बड़ा उल्लंघन है। भारत के संविधान में ऐसे प्रावधान भी हैं जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, समाज के कमजोर वर्गों, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर असर डालते हैं।
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Pages:1-2
How to cite this article:
डॉ. श्यामलाल1, लकी कुमार श्रीवास्तव2 "शिक्षा और समानताः भारत में आदिवासी बच्चों के अधिकार ‘‘आदिवासी बच्चों के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा का अधिकारः मुद्दे और चुनौतियां‘‘". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 1-2
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