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VOL. 1, ISSUE 11 (2016)
राष्ट्र कवि दिनकर के काव्य में राजनीतिक चेतना
Authors
Birmati
Abstract
राजनीति समाज का एक महत्वपूर्ण पक्ष हैं। समाज के निर्माण और वयक्तित्व के उत्थान दोनों में राजतीति का योगदान होता है। साहित्यकार जिस समाज में जीता हैं, युग को जिस राजनीति में अपने व्यक्तित्व का विकास करता है, उसकी प्रतिच्दाया उसके साहित्य में परिलक्षित हो उठती है। युग के प्रति जागरूक और सामाजिक परिवेश का चितेरा कवि राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव से अपने को मुक्त नहीं रख सकता, आधुनिक युग के कवि दिनकर ने तत्कालिन युग में प्रचलित सभी सामाजिक और राजनीतिक विचारधाराओं पर चिंतन-मनन किया हैं किन्तु अभिव्यक्ति केवल उन्हे ही दी हैं जिन्हे युग ने ग्रहण किया हैं, युग की जो राजनीतिक सामाजिक चेतना रही है, उन्हे तटस्थ भाव से अभिव्यक्त् कर दिया है, दिनकर पर किसी वाद विशेषस का स्थायी प्रभाव नहीं पड़ता हैं, समय पड़ने पर और आवश्यकता अनुभव करने पर वे उसी राजनीतिक धारा का खुलकर विरोध करते हैं, जिसे कभी उन्होने बड़ी श्रद्वा से सराहा था। दिनकर की राजनीतिक चेतना क्रांतिधर्मा युवकों को जेजस्विता देती हैं।
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Pages:55-56
How to cite this article:
Birmati "राष्ट्र कवि दिनकर के काव्य में राजनीतिक चेतना". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 1, Issue 11, 2016, Pages 55-56
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