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VOL. 1, ISSUE 7 (2016)
प्रार्थना सभा का आयोजन-आध्यात्मिक व भावनात्मक विकास की ओर एक कदम
Authors
नेहा गोस्वामी, आरती सिंह
Abstract
वर्तमान समय की आवश्यकता है कि समाज में ऐसे नागरिक तैयार किए जाएँ जो अपने कार्यों के द्वारा न केवल स्वयं को समृद्ध करें अपितु समाज और राष्ट्र को भी समृद्ध करें तथा साथ ही समाज में शांति व सद्भावनापूर्ण वातावरण स्थापित करने में सहायक बनें। उनमें ऐसे गुण हों जो उन्हें समाज की सेवा के लिए प्रेरित करें। ऐसे नागरिक तैयार करने में शिक्षा सहायता करती है। शिक्षा के द्वारा छात्र में क्षमा, दया, सरलता, सहयोग, त्याग, विनम्रता, शांति, प्रेम, सत्य जैसी कोमल व उद्दात भावनाओं का विकास करके ही विश्व में शांति, सद्भावना व विश्वबन्धुत्व को स्थापित किया जा सकता है। प्रार्थना, स्तुति, कीर्तन, ध्यान एवं संगीत तथा कला के अभ्यास से इन सुप्त मानवीय भावनाओं को जाग्रत करना संभव है। प्रार्थना के महत्त्व को समझते हुए ही प्रायः सभी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में दिनचर्या का प्रारम्भ प्रार्थना सभा से किया जाता है। अधिकांश विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रार्थना सभा को औपचारिकतापूर्ण सम्पन्न कराया जाता है। विद्यालय प्रार्थना सभा में वर्षों से एक ही परम्परा का निर्वाह करते चले आ रहे हैं, अपवाद छोड़ दिए जाएँ तो अधिकांश विद्यालयों प्रार्थना सभा नीरस होती है और अपने उद्देश्य की पूर्ति में सहायक नहीं होती। मानसिक शांति, आध्यात्मिक उत्थान तथा आंतरिक प्रगति व सद्मूल्यों के विकास के लिए आवश्यक है कि विद्यालयों में प्रार्थना सभा का आयोजन परम्परागत न हो। इसके लिए पुनः पाठ्यक्रम में प्रार्थना सभा के आयोजन व उद्देश्य को ध्यान में रखकर प्रार्थना की योजना का निर्माण किए जाने की आवश्यकता को यह लेख दर्शाता है।
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Pages:76-78
How to cite this article:
नेहा गोस्वामी, आरती सिंह "प्रार्थना सभा का आयोजन-आध्यात्मिक व भावनात्मक विकास की ओर एक कदम ". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 1, Issue 7, 2016, Pages 76-78
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