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VOL. 3, ISSUE 3 (2018)
हो और सबर जनजातियों के गृह वातावरणका उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर पड़ने वाले प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन (पश्चिम सिंहभूम जिले के विशेष संदर्भ में)
Authors
नितेश कुमार प्रधान, डाॅ0 पी0 के0 नायक
Abstract
आज जब औद्योगिक विकास के लिए खनिज सम्पदा और जंगल-पहाड़ के इलाके राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था के लिए अनिवार्यतः उपयोगी माने जा रहे हैं और ये सारी सहूलियतें इन्हीं आदिवासी अंचलों में सुलभ हैं तो क्या क्षेत्रीय या राष्ट्रीय हितों के लिए 10 प्रतिशत आदिवासियों को विस्थापित कर उनकी अपनी जीवन शैली, समाज-संरचना, सांस्कृतिक मूल्यों में बलात वंचित कर किया जाए? यानी आज यह सर्वोपरी आवश्यकता दिख रही है कि विकास की मौजूदा अवधारणा की एक बार फिर समीक्षा की जाए और नई आधुनिक व्यवस्था में जनजातीय समूहों के मानवीय अधिकारों की समुचित अभिरक्षा की जाए। तो वह एक शिक्षित व्यक्ति के रूप में उभरकर आता है। शिक्षा ही एक आदिवासी के जीवन शैली को प्रभावित करता है। इसीलिए सरकार द्वारा आदिवासियों को शिक्षा प्रदान करने हेतु विभिन्न प्रकार की योजनाओं का निर्वहन कर रही है। प्रस्तुत शोध पत्र झारखण्ड के पश्चिमी सिंहभूम जिले को लिया गया है। इस जिले को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र भी कहा गया है। यहां के आदिवासियों का रहन-सहन, शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है।
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Pages:42-45
How to cite this article:
नितेश कुमार प्रधान, डाॅ0 पी0 के0 नायक "हो और सबर जनजातियों के गृह वातावरणका उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर पड़ने वाले प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन (पश्चिम सिंहभूम जिले के विशेष संदर्भ में)". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 3, Issue 3, 2018, Pages 42-45
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