International Journal of Advanced Education and Research

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International Journal of Advanced Education and Research
Vol. 4, Issue 4 (2019)

घरेलू हिंसा के संदर्भ में भारतीय संविधान और न्यायपालिका की पहल: समीक्षा शोध पत्र


स्वाती श्रीवास्तवा, रजनी श्रीवास्तव

भारतीय समाज मे महिलाओं के साथ दिन-प्रतिदिन हिंसा बढ़ती चली जा रही है, जिनमे किसी महिला के साथ परिवार के अंदर होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा जैसे मारपीट शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न आदि प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त महिला की इच्छा के विरुद्ध उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करना, दहेज के लिए मारपीट करना तथा इसके लिए उसकी हत्या कर देना महिलाओं के प्रति हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि महिलाओ की सुरक्षा हेतु कानूनी प्रावधान बनाए गए ताकि महिलाओं के साथ दिन प्रतिदिन बढ्ने वाली हिंसा के रोकथाम के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो सके। महिला के संरक्षण के लिए संविधान मे बदलाव सामाजिक दृष्टिकोण से आवश्यक है लेकिन उसके स्थायी विकास के लिए सांस्कृतिक मूल्यों एवं सामाजिक ढांचे का सुनिश्चित होना भी अतिआवश्यक है। वर्ष 2005 में निर्मित महिला संरक्षण अधिनियम महिला संबंधी कानूनों और महिला जागरुकता का एक अद्भुत परिणाम है। जिसके कारण आज घरेलू हिंसा के सभी प्ररूपों को समाज मे बढ़ चढ़ कर सशक्तिकरण के साथ सामने लाया जा रहा है यह विधेयक 8 मार्च वर्ष 2002 को भारत सरकार के स्त्री एवं बालक तथा मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित विधेयक का पारित किया गया रूप है। यह शोधपत्र “घरेलू हिंसा अधिनियम 2005” के मुख्य बिन्दुओ पर आधारित है, जिसमें प्रमुख रूप से अधिनियम के उद्देश्य, पृष्ठभूमि, अभिप्राय एवं प्रावधान, सबल और निर्बल पक्ष हिंसा का स्वरूप तथा विविध आयाम बिंदुओ पर प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त इस शोधपत्र मे घरेलू हिंसा के चार मुख्य प्रकार जिनमे शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, आर्थिक और भावनात्मक हिंसा के संक्षिप्त और मूल उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है। इस शोध पत्र में संविधान और न्यायपालिका की भूमिका का जमीनी स्तर पर प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है, जिसमे सामाजिक गतिशीलता और संस्कृति के अंतरसंबंध को भी दर्शाया गया है। अभी का तीन तलाक पर बना कानून इसका साक्षय है।
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स्वाती श्रीवास्तवा, रजनी श्रीवास्तव. घरेलू हिंसा के संदर्भ में भारतीय संविधान और न्यायपालिका की पहल: समीक्षा शोध पत्र. International Journal of Advanced Education and Research, Volume 4, Issue 4, 2019, Pages 74-78
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