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VOL. 5, ISSUE 5 (2020)
लैंगिक संवेदनशीलता एवं महिला सुरक्षाः दशा एवं दिशा
Authors
प्रतिमा सिंह
Abstract
अपनी अस्मिता व आत्मसम्मान की रक्षा के लिए पुरुषवादी समाज के सामने महिलाएं अपने वजूद की तलाश कर रही हंै, उसकी यह खोज सदियों से चलती चली आ रही है। वह मां, बेटी, बहन, पत्नी की विभिन्न भावनात्मक बंदिशों से पृथक एक स्त्री के रूप में अपनी पहचान की तलाश कर रही है। आत्म सम्मान को पाने के लिए जब महिलाएं संगठित हुईं तो उनके संघर्ष की कहानी का एक नया इतिहास रचा जाने लगा, महिलाओं की इन संघर्षमयी प्रयासों ने ही पुरुषवादी समाज को महिला सशक्तिकरण हेतु विवश किया, उनके प्रति होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध उन्हें कानूनी संरक्षण दिया गया है। इन प्रयासों के द्वारा महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देने की व्यवस्था तो की गई लेकिन उस आधार को पीछे छोड़ दिया गया जहां से समाज बनता है अर्थात् परिवार को एक घर में बदलता है, परिवर्तित करता है साथ ही इस घर में महिला को महिला होने का बोध कराने की प्रक्रिया का आरंभ होता है। विभिन्न कानूनी प्रयासों के बावजूद ना जाने क्यों महिला और हिंसा का साथ शरीर और उसकी छाया जैसे हैं जो एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ते अर्थात आज भी घर की चहारदीवारी में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। सुरक्षा एक ऐसी परिस्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति भयमुक्त व संकोच रहित रहकर अपने व्यक्तित्व का विकास कर सके और गरिमामय जीवन जी सकें। लेकिन दुनिया की आधी आबादी यानी ‘महिलाएं’ आज भी इस भय से मुक्त नहीं हो पायी हैं चाहे बात घर की हो या बाहर की अथवा कार्यस्थल की। आज महिलाएं हर जगह असुरक्षित महसूस करती हैं। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है। भारत महिलाओं को भयमुक्त सहज जीवन जीने की परिस्थितियां उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
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Pages:65-67
How to cite this article:
प्रतिमा सिंह "लैंगिक संवेदनशीलता एवं महिला सुरक्षाः दशा एवं दिशा". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 5, Issue 5, 2020, Pages 65-67
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